वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025, आज लोकसभा में पेश किया जाएगा। यह विधेयक प्रश्नकाल के बाद दोपहर 12 बजे सदन में प्रस्तुत होगा, जिसमें अध्यक्ष ने चर्चा के लिए आठ घंटे का समय निर्धारित किया है। इसमें से 4 घंटे 40 मिनट सरकार को और शेष समय विपक्ष को आवंटित किया गया है। तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने विधेयक के समर्थन की घोषणा की है और अपने सांसदों को सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया है।
विधेयक का विरोध कर रहे दल
विपक्षी दलों ने इस विधेयक का विरोध करने की योजना बनाई है। इन दलों में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा), राष्ट्रीय जनता दल (राजद), तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके), वाम दल, ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके), भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस), बीजू जनता दल (बीजेडी) और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) शामिल हैं। इन दलों के सांसदों की कुल संख्या 234 है।
लोकसभा और राज्यसभा में संख्या बल
लोकसभा में कुल 543 सांसद हैं, जिसमें बहुमत के लिए 272 सांसदों का समर्थन आवश्यक है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पास वर्तमान में 294 सांसद हैं, जबकि इंडिया गठबंधन के पास 234 सांसद हैं। इस संख्या बल के आधार पर, सरकार के लिए लोकसभा में विधेयक पारित कराना अपेक्षाकृत सरल होगा। राज्यसभा में कुल 245 सदस्य होते हैं, लेकिन वर्तमान में 236 सांसद हैं। यहां, सरकार के पास 121 सदस्यों का समर्थन है, जिसमें 115 सांसद एनडीए के और 6 मनोनीत सदस्य शामिल हैं। विधेयक को पारित करने के लिए राज्यसभा में 119 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता है, जो बहुमत से दो अधिक है।
संशोधन की पृष्ठभूमि और जेपीसी रिपोर्ट
यह विधेयक पहले 19 फरवरी को कैबिनेट के समक्ष रखा गया था और मंजूरी मिलने के बाद संसद में पेश किया गया था। विपक्ष की मांग पर इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजा गया, जिसने 13 मार्च को संसद में 655 पृष्ठों की रिपोर्ट प्रस्तुत की। जेपीसी की सिफारिशों के आधार पर, सरकार ने कुछ महत्वपूर्ण सुझावों को स्वीकार किया, जिनमें कानून को पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू न करना, पुरानी मस्जिदों, दरगाहों और धार्मिक स्थलों से छेड़छाड़ न करना, और भूमि संबंधी मामलों में राज्यों की राय लेना शामिल है।
विधेयक के प्रमुख प्रावधान और उद्देश्य
वक्फ संशोधन विधेयक का मुख्य उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और संचालन में सुधार करना है। विधेयक में प्रस्तावित प्रमुख प्रावधानों में शामिल हैं:
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सर्वेक्षण प्रक्रिया में बदलाव: वर्तमान में वक्फ संपत्तियों का सर्वेक्षण सर्वे कमिश्नर द्वारा किया जाता है। संशोधन के तहत, यह जिम्मेदारी जिला कलेक्टर को सौंपी जाएगी, जिससे सर्वेक्षण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी होगी।
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वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति: विधेयक में केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्डों में कम से कम दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति का प्रावधान है। इसका उद्देश्य बोर्ड में विविधता और विशेषज्ञता बढ़ाना है, हालांकि मुस्लिम समुदाय का बहुमत बना रहेगा।
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संपत्तियों की समीक्षा और संरक्षण: विधेयक जिला कलेक्टर को यह अधिकार देता है कि वे उन संपत्तियों की समीक्षा करें जिन्हें गलत तरीके से वक्फ संपत्ति घोषित किया गया हो, विशेषकर यदि वे सरकारी संपत्ति हों। वैध वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
विपक्ष की चिंताएं और विरोध के कारण
विपक्षी दलों और कुछ मुस्लिम संगठनों ने विधेयक के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताई है:
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धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप: विपक्ष का मानना है कि गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति से वक्फ बोर्डों के धार्मिक मामलों में सरकारी हस्तक्षेप बढ़ेगा, जिससे मुस्लिम समुदाय की स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है।
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संपत्तियों की समीक्षा का अधिकार: विपक्षी दलों का कहना है कि जिला कलेक्टर को संपत्तियों की समीक्षा का अधिकार देने से वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न हो सकता है और इससे समुदाय की संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ सकता है।
सरकार का पक्ष और समर्थन के तर्क
सरकार का तर्क है कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और दक्षता लाने के लिए आवश्यक है। अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि इस विधेयक से किसी के अधिकार नहीं छीने जाएंगे, बल्कि यह उन लोगों को उनका