पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) से इस वक्त की सबसे बड़ी कूटनीतिक खबर सामने आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के मुहाने पर खड़ी दुनिया को फिलहाल बड़ी राहत मिली है और दोनों देशों के बीच परमाणु समझौते (Nuclear Deal) को लेकर एक बार फिर से बातचीत का दौर शुरू हो गया है।
मिडिल ईस्ट आई (Middle East Eye) ने अरब राजनयिक सूत्रों के हवाले से एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, 19 मई यानी मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर एक बड़े और विनाशकारी सैन्य हमले का अंतिम फैसला लेने वाले थे। लेकिन ऐन वक्त पर खाड़ी के दो सबसे प्रभावशाली देशों—सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE)—के कड़े हस्तक्षेप और आग्रह के बाद ट्रंप ने युद्ध का रास्ता छोड़कर बातचीत की मेज पर आने का फैसला किया।
सऊदी और यूएई ने ट्रंप को क्यों रोका?
अरब सूत्रों के मुताबिक, सऊदी अरब और यूएई ने अमेरिका को साफ शब्दों में चेतावनी दी थी कि इस समय युद्ध शुरू करना पूरे मुस्लिम जगत के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है। इसके पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
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लाखों हाजियों की सुरक्षा का सवाल: खाड़ी देशों ने ट्रंप को समझाया कि इस समय पवित्र 'हज यात्रा' का समय है। दुनिया के कोने-कोने से लाखों मुसलमान सऊदी अरब पहुंच रहे हैं। अगर ऐसे नाजुक समय में युद्ध या हवाई हमले शुरू होते हैं, तो पूरी खाड़ी में स्थिति बेकाबू हो जाएगी और लाखों निर्दोष लोग युद्ध क्षेत्र के बीच सऊदी अरब में फंस जाएंगे।
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अमेरिका की वैश्विक छवि को नुकसान: सऊदी अरब ने ट्रंप प्रशासन से स्पष्ट कहा कि हज के दौरान किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई से दुनिया भर के अरब और गैर-अरब मुसलमानों के बीच वाशिंगटन (अमेरिका) की छवि बेहद खराब होगी, जिसे सुधारना भविष्य में नामुमकिन होगा।
इस साल की हज यात्रा का समीकरण
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24 मई से शुरुआत: रिपोर्ट के अनुसार, इस साल की पवित्र हज यात्रा 24 मई से आधिकारिक तौर पर शुरू हो रही है, जो अगले छह दिनों तक चलेगी।
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10 लाख हाजियों के जुटने की उम्मीद: इस वैश्विक धार्मिक यात्रा में शामिल होने के लिए दुनिया भर से लगभग 10 लाख से अधिक मुस्लिम श्रद्धालुओं के सऊदी अरब पहुंचने का अनुमान है।
खाड़ी देशों की इस समयोचित और प्रभावी कूटनीति के कारण ही अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने कदम पीछे खींचे, जिसके बाद कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता से एक बार फिर 'ईरान पीस प्रपोजल' और एक पन्ने के ड्राफ्ट मेमोरेंडम पर बातचीत का रास्ता साफ हो सका है।