कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में 15 साल पुराने ममता बनर्जी के शासन के अंत के साथ ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। राज्य में पहली बार सरकार बनाने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) के आते ही अभिषेक बनर्जी अब कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई के मुख्य केंद्र बन चुके हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के लगातार हमलों और कड़े फैसलों के बीच अभिषेक को एक के बाद एक कई बड़े झटके लग रहे हैं।
9 मई 2026 को ऐतिहासिक 207 सीटें जीतकर बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले शुभेंदु अधिकारी ने पद संभालते ही टीएमसी के शीर्ष नेतृत्व पर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। इसी कड़ी में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित तौर पर धमकी भरा बयान देने और भड़काऊ भाषण देने के आरोप में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ एक बड़ी एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है। इसके अलावा, जांच एजेंसियों द्वारा उनकी कथित अवैध संपत्तियों का ब्योरा भी सार्वजनिक किया जा रहा है, जिसने टीएमसी खेमे में खलबली मचा दी है।
अभिषेक बनर्जी के लिए राजनीतिक मोर्चे पर भी स्थितियां अनुकूल नहीं दिख रही हैं। उनके सबसे भरोसेमंद और करीबी साथी माने जाने वाले टीएमसी नेता जहांगीर खान ने ऐन वक्त पर फलता विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने से पैर पीछे खींच लिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी से ममता बनर्जी के हटते ही अभिषेक बनर्जी के इर्द-गिर्द का सुरक्षा कवच पूरी तरह टूट चुका है। बीजेपी सरकार के इस आक्रामक रुख से साफ है कि आने वाले दिनों में डायमंड हार्बर के सांसद की कानूनी और राजनीतिक राह और भी ज्यादा कांटों भरी होने वाली है।