अक्सर लोग विदेश यात्रा की तैयारी करते समय पासपोर्ट और वीजा पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन अपनी दवाइयों को लेकर लापरवाही बरत देते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में आसानी से मिलने वाली कुछ सामान्य दवाइयाँ विदेशों में प्रतिबंधित या नियंत्रित (Controlled) हो सकती हैं, जिससे आप एयरपोर्ट कस्टम्स की जांच में फंस सकते हैं।
क्यों आती है परेशानी?
थाने स्थित केआईएमएस (KIMS) अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. सुंदर कृष्णन के अनुसार, दर्द निवारक (Painkillers), नींद की गोलियाँ, चिंता (Anxiety) और खांसी के सिरप (खासकर कोडीन युक्त) को लेकर विभिन्न देशों में कड़े नियम हैं। अगर आप बिना डॉक्टर के पर्चे (Prescription) या भारी मात्रा में दवाइयाँ ले जा रहे हैं, तो कस्टम अधिकारी आपसे पूछताछ कर सकते हैं।
इन बातों का रखें खास ख्याल:
- डॉक्टर का पर्चा अनिवार्य: हमेशा अपने साथ डॉक्टर का ओरिजिनल पर्चा रखें। इसमें मरीज का नाम, बीमारी का निदान (Diagnosis) और दवा की खुराक (Dosage) स्पष्ट लिखी होनी चाहिए।
- ओरिजिनल पैकेजिंग: दवाइयों को उनकी मूल पैकेजिंग और स्ट्रिप्स में ही रखें। बिना लेबल वाली या खुली हुई गोलियां संदेह पैदा करती हैं।
- सीमित मात्रा: केवल उतनी ही दवाइयाँ साथ रखें जितनी यात्रा के लिए जरूरी हों। यदि आप 15 दिन की यात्रा पर हैं और 6 महीने का स्टॉक ले जा रहे हैं, तो यह व्यावसायिक गतिविधि (Commercial activity) का संदेह पैदा कर सकता है।
- दूतावास की वेबसाइट चेक करें: जिस देश में आप जा रहे हैं या जहाँ आपका लेओवर (Layover) है, वहाँ के दूतावास की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रतिबंधित दवाओं की सूची जरूर देख लें।
- मेडिकल समरी साथ रखें: यदि आप मधुमेह (Diabetes), रक्तचाप (BP) या अस्थमा जैसी पुरानी बीमारी के मरीज हैं, तो एक संक्षिप्त मेडिकल रिपोर्ट साथ रखना फायदेमंद होता है।
विशेषज्ञों की सलाह
सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) का सुझाव है कि यदि आपकी जरूरी दवा किसी देश में प्रतिबंधित है, तो अपने डॉक्टर से बात करें और उसका कोई विकल्प (Alternative) तलाशें। साथ ही, दवाइयों को हमेशा अपने 'हैंड बैगेज' (Hand luggage) में रखें ताकि जरूरत पड़ने पर आप उन्हें तुरंत दिखा सकें।
सावधानी ही बचाव है: एक छोटी सी नींद की गोली या खांसी की दवा भी विदेशी धरती पर आपको कानूनी मुश्किल में डाल सकती है। इसलिए पूरी तैयारी और दस्तावेजों के साथ ही उड़ान भरें।