मुंबई, 1 मई, (न्यूज़ हेल्पलाइन) आंध्र प्रदेश के वन विभाग ने पूर्वी घाट वन्यजीव सोसायटी (Eastern Ghats Wildlife Society) के साथ मिलकर 'पीकॉक टैरंटुला' (Peacock Tarantula) मकड़ी के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण सर्वेक्षण शुरू किया है। यह सर्वेक्षण नागार्जुनसागर श्रीशैलम टाइगर रिजर्व (NSTR) के विशाल क्षेत्र में आयोजित किया जा रहा है।
सरकार की पहल
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण के नेतृत्व में इस परियोजना को हरी झंडी दी गई है। पवन कल्याण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इसकी घोषणा करते हुए इस मकड़ी को "पूर्वी घाट का एक दुर्लभ रत्न" बताया। उन्होंने कहा कि संरक्षण केवल बाघों जैसे बड़े जानवरों के लिए नहीं, बल्कि इन दुर्लभ और अद्वितीय जीवों के लिए भी जरूरी है जो पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
क्यों खास है यह मकड़ी?
- अद्वितीय रंग: यह मकड़ी अपने गहरे नीले रंग के लिए जानी जाती है, जो उम्र के साथ और गहरा होता जाता है।
- दुर्लभता: यह दुनिया की सबसे दुर्लभ मकड़ियों में से एक है और केवल पूर्वी घाट के एक छोटे से हिस्से में पाई जाती है।
- पारिस्थितिक भूमिका: यह कीटों की आबादी को नियंत्रित कर प्रकृति में संतुलन बनाए रखने में मदद करती है।
खतरे में अस्तित्व
पीकॉक टैरंटुला वर्तमान में 'गंभीर रूप से लुप्तप्राय' (Critically Endangered) श्रेणी में है। इसके अस्तित्व को तीन मुख्य चीजों से खतरा है:
- आवास (Habitats) का नुकसान।
- जंगलों की कटाई।
- विदेशी पालतू जानवरों के रूप में इसका अवैध व्यापार।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह सर्वेक्षण इस प्रजाति की आबादी और वितरण को समझने में मदद करेगा, जिससे भविष्य में इसे विलुप्त होने से बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकेंगे।