नई दिल्ली: काफी बहस और चर्चा के बाद आखिरकार वक्फ (संशोधन) विधेयक को लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों से पारित कर दिया गया। देर रात तक चली लंबी बहसों और मत विभाजन के बाद इस विधेयक को मंजूरी दी गई, जिससे यह अब कानून बनने की दहलीज पर पहुंच चुका है। इस विधेयक के माध्यम से सरकार ने वक्फ संपत्तियों से जुड़े एक अहम प्रावधान में बदलाव किया है, जो ना सिर्फ वक्फ बोर्ड के कार्यक्षेत्र को प्रभावित करेगा बल्कि आम लोगों की संपत्ति पर दावे और विवादों के संदर्भ में भी बड़ा बदलाव लाएगा।
वक्फ अधिनियम में किया गया बड़ा बदलाव: धारा 107 अब समाप्त
1995 के वक्फ अधिनियम की धारा 107 के अनुसार वक्फ संपत्तियों को सीमा अधिनियम (Limitation Act), 1963 से छूट दी गई थी। इसका मतलब यह था कि वक्फ बोर्ड किसी भी समय किसी संपत्ति पर दावा कर सकता था, भले ही वह संपत्ति वर्षों से किसी अन्य व्यक्ति के कब्जे में क्यों न रही हो। लेकिन अब यह छूट समाप्त कर दी गई है। वर्तमान वक्फ संशोधन विधेयक में सरकार ने धारा 107 को हटाने का प्रस्ताव रखा है, जिसे संसद की मंजूरी भी मिल चुकी है। अब वक्फ बोर्ड को भी लिमिटेशन एक्ट के दायरे में लाया गया है, जिससे संपत्ति विवादों में एक निर्धारित समय सीमा लागू हो गई है।
लिमिटेशन एक्ट क्या है?
सीमा अधिनियम (Limitation Act), 1963 एक ऐसा कानून है जो तय करता है कि किसी भी विवाद, संपत्ति पर दावा, या कानूनी कार्यवाही के लिए अधिकतम कितनी समयावधि होनी चाहिए।
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उदाहरण के तौर पर, अगर कोई व्यक्ति आपकी जमीन पर कब्जा कर लेता है, तो आपको 12 साल के भीतर अदालत में दावा करना होगा।
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यदि यह अवधि बीत जाती है, तो अदालत दावा खारिज कर सकती है।
इस प्रावधान का मतलब होता है कि संपत्ति के मामले में समय की एक सीमा तय होती है और उसके बाद कोई भी दावा वैध नहीं माना जाता।
पहले वक्फ को मिली थी छूट
1995 के वक्फ अधिनियम में यह प्रावधान था कि वक्फ संपत्तियों पर लिमिटेशन एक्ट लागू नहीं होगा। इसका सीधा मतलब यह था कि भले ही कोई व्यक्ति 50 वर्षों से किसी जमीन पर काबिज हो, फिर भी वक्फ बोर्ड दावा कर सकता था कि वह ज़मीन उनकी है।
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इससे कई बार जमीन के मालिकों को अचानक ही वक्फ के नोटिस मिल जाते थे।
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अदालतों में वर्षों तक विवाद चलते रहते थे।
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और आम नागरिकों में अनिश्चितता और भय का माहौल बना रहता था।
अब क्या बदलेगा?
वर्तमान वक्फ संशोधन विधेयक में धारा 107 को हटाकर वक्फ बोर्ड को लिमिटेशन एक्ट के दायरे में लाया गया है। इसका मतलब यह हुआ कि:
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अब वक्फ बोर्ड को किसी भी संपत्ति पर दावा करने के लिए एक निश्चित समयसीमा का पालन करना होगा।
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अगर कोई संपत्ति 12 साल से अधिक समय तक किसी अन्य व्यक्ति के कब्जे में रही है, तो वक्फ बोर्ड उस पर अब दावा नहीं कर सकेगा।
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इससे “प्रतिकूल कब्जा” (Adverse Possession) का सिद्धांत लागू होगा, जिसके तहत कब्जेधारी व्यक्ति ही उस संपत्ति का मालिक माना जाएगा।
सरकार का क्या कहना है?
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने संसद में विधेयक प्रस्तुत करते हुए कहा कि वक्फ बोर्डों की मनमानी को रोकने और संपत्ति विवादों को सीमित करने के लिए यह संशोधन आवश्यक था।
उन्होंने कहा:
“वक्फ बोर्ड कभी भी किसी भी संपत्ति पर दावा कर रहा था, जिससे आम लोग डर और असमंजस में रहते थे। लिमिटेशन एक्ट लागू होने के बाद लोगों को राहत मिलेगी और संपत्ति विवादों में न्याय मिलेगा।” सरकार का तर्क है कि यह बदलाव न्यायिक पारदर्शिता को बढ़ाएगा, वक्फ संपत्तियों का दुरुपयोग रोकेगा और आम नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा करेगा।
विपक्ष की चिंताएं
हालांकि कुछ विपक्षी दलों ने इस विधेयक को लेकर चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जे को बढ़ावा मिल सकता है और वास्तविक वक्फ संपत्तियों को खोने का खतरा पैदा हो जाएगा। कुछ सांसदों ने यह सवाल उठाया कि क्या सरकार अल्पसंख्यक समुदायों की संपत्तियों की सुरक्षा करने में सक्षम होगी जब वक्फ बोर्ड की शक्ति को सीमित किया जा रहा है।
आम लोगों के लिए राहत
इस विधेयक से सामान्य नागरिकों को सबसे अधिक राहत मिलेगी।
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अब कोई व्यक्ति यदि वर्षों से किसी जमीन पर काबिज है, तो वक्फ बोर्ड उस पर बिना समयसीमा के दावा नहीं कर सकेगा।
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इससे संपत्ति को लेकर चलने वाले अनगिनत मुकदमों में कमी आएगी।
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लोग अपनी संपत्ति को लेकर अधिक निश्चिंत और सुरक्षित महसूस करेंगे।
भविष्य में क्या होगा असर?
1. वक्फ बोर्डों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता
अब वक्फ बोर्ड को सभी दावों के लिए प्रमाण और समयसीमा देना अनिवार्य होगा। इससे भ्रष्टाचार और राजनीतिक प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी।
2. अदालतों में लंबित मामलों में कमी
वक्फ संपत्तियों को लेकर वर्षों से चल रहे मुकदमों में अब एक तय सीमा लागू हो जाएगी, जिससे मामलों का जल्द निपटारा संभव होगा।
3. वास्तविक मालिकों को संरक्षण
जो लोग दशकों से किसी जमीन पर रह रहे हैं, उन्हें वक्फ के दावों से छुटकारा मिलेगा।
निष्कर्ष: बदलाव का स्वागत या विरोध?
वक्फ संशोधन विधेयक एक बड़ा कानूनी बदलाव है जो भारत की संपत्ति कानून व्यवस्था में नई दिशा देगा।
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समर्थकों का मानना है कि यह न्याय और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम है।
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आलोचकों को डर है कि इससे अल्पसंख्यक संपत्तियों की सुरक्षा कमजोर होगी। लेकिन एक बात स्पष्ट है—अब वक्फ बोर्ड को भी सामान्य कानूनों के अंतर्गत काम करना होगा, और यह बदलाव भारत में समानता की दिशा में एक ठोस कदम माना जा सकता है।