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वडोदरा हिट एंड रन मामले के मुख्य आरोपी रक्षित चौरसिया की बढ़ीं मुश्किलें, FSL रिपोर्ट में सामने आई सच्चाई

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Posted On:Saturday, April 5, 2025

वडोदरा, गुजरात — गुजरात के वडोदरा में होली के दिन हुई दिल दहला देने वाली सड़क दुर्घटना अब एक गंभीर कानूनी मोड़ पर पहुंच चुकी है। हिट एंड रन मामले के मुख्य आरोपी रक्षित चौरसिया की एफएसएल रिपोर्ट सामने आ गई है, जिसमें उसके रक्त में मादक पदार्थ (गांजा) की पुष्टि हुई है। इस रिपोर्ट ने मामले को और भी संवेदनशील और जटिल बना दिया है। पुलिस के अनुसार, दुर्घटना से कुछ समय पहले रक्षित ने अपने दो दोस्तों के साथ गांजा सेवन किया था।

एफएसएल रिपोर्ट से बड़ा खुलासा

वडोदरा पुलिस द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, आरोपी रक्षित चौरसिया ने अपने दोस्त पंशु चौहान के साथ सुरेश भारवाड़ के घर पर गांजा का सेवन किया था। गांधीनगर स्थित फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) से प्राप्त रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई है कि तीनों – रक्षित चौरसिया, पंशु चौहान और सुरेश भारवाड़ – नशे की हालत में थे। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस तथ्य से यह साबित होता है कि रक्षित हादसे के वक्त नशे की हालत में गाड़ी चला रहा था, जिससे घटना की गंभीरता और भी बढ़ जाती है।

तीनों आरोपियों पर मामला दर्ज

एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद वडोदरा पुलिस ने तीनों के खिलाफ करेलीबाग पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल रक्षित चौरसिया वडोदरा सेंट्रल जेल में बंद है, जबकि बाकी दोनों आरोपी – पंशु चौहान और सुरेश भारवाड़ – फरार हैं। पुलिस की दो विशेष टीमें उनकी अंतिम लोकेशन और खुफिया जानकारी के आधार पर उन्हें पकड़ने में जुटी हैं। डीसीपी पन्ना मोमैया ने मीडिया से बातचीत में बताया कि इन दोनों की गिरफ्तारी के लिए तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

क्या हुआ था होली की रात?

13 मार्च की रात लगभग 11 बजे, जब पूरा शहर होली के जश्न में डूबा हुआ था, रक्षित चौरसिया तेज़ रफ्तार फॉक्सवैगन कार चला रहा था। उसने एक के बाद एक तीन दोपहिया वाहनों को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और एयरबैग खुल गए। इस हादसे में 40 वर्षीय महिला हेमाली पूरव पटेल की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 10 और 12 साल की दो बच्चियों सहित 7 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए। हेमाली होली का सामान लेने निकली थीं और स्कूटर चला रही थीं।

एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला

इस घटना के बाद न केवल मोटर व्हीकल एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया, बल्कि नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट के अंतर्गत भी चार्ज जोड़े गए। गांजा का सेवन करना NDPS एक्ट की धारा 27 के तहत दंडनीय अपराध है। अगर आरोप सिद्ध होते हैं, तो तीनों आरोपियों को लंबी सजा और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।

बॉलीवुड अभिनेत्री जान्हवी कपूर का रिएक्शन

इस मामले ने उस वक्त और अधिक सुर्खियां बटोरीं जब बॉलीवुड अभिनेत्री जान्हवी कपूर ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। जान्हवी ने सोशल मीडिया पर घटना की कड़ी निंदा करते हुए लिखा, "एक मासूम महिला और बच्चों की जिंदगी पर इस तरह का हमला असहनीय है। कानून को सख्त से सख्त कदम उठाने चाहिए।" उनकी इस प्रतिक्रिया ने राष्ट्रीय स्तर पर भी इस केस को तवज्जो दिलाई, जिससे गुजरात पुलिस पर त्वरित कार्रवाई का दबाव और बढ़ गया।

आरोपी कौन हैं?

पुलिस जांच के अनुसार, रक्षित चौरसिया मूल रूप से उत्तर प्रदेश के वाराणसी का निवासी है और वडोदरा के एमएस यूनिवर्सिटी में लॉ का छात्र है। वहीं पंशु चौहान वाघोडिया स्थित पारुल यूनिवर्सिटी में मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई कर रहा है। तीसरे आरोपी सुरेश भारवाड़ का संबंध वडोदरा के स्थानीय निवासी के रूप में सामने आया है।

ड्रग्स और सड़क सुरक्षा – दोहरी चुनौती

यह घटना एक बार फिर से इस गंभीर सवाल को जन्म देती है कि युवा वर्ग में नशे का बढ़ता चलन समाज के लिए कितना खतरनाक हो सकता है। न केवल वे अपनी ज़िंदगी को खतरे में डालते हैं, बल्कि मासूम लोगों की ज़िंदगियों को भी तबाह कर सकते हैं। सड़क सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि कानून में सख्ती के बावजूद नशे की हालत में वाहन चलाने की घटनाएं कम नहीं हो रही हैं। एनडीपीएस अधिनियम को लागू करने वाली एजेंसियों और ट्रैफिक विभाग के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है।

आगे क्या?

वडोदरा पुलिस अब एफएसएल रिपोर्ट को अदालत में सबूत के रूप में पेश करेगी। साथ ही, फरार आरोपियों की तलाश भी जोरों पर है। इस बीच, पीड़ित परिवारों ने न्याय की मांग को लेकर राज्य सरकार से अपील की है कि इस मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाए ताकि त्वरित न्याय सुनिश्चित किया जा सके।

निष्कर्ष

वडोदरा हिट एंड रन केस ने न केवल एक निर्दोष महिला की जान ली, बल्कि समाज को यह भी सोचने पर मजबूर कर दिया कि नशा, लापरवाही और कानून की अनदेखी मिलकर कैसे भयावह परिणाम दे सकती है। अब जब एफएसएल रिपोर्ट में ड्रग्स की पुष्टि हो चुकी है, तो पुलिस और न्यायिक प्रणाली पर यह जिम्मेदारी है कि वह कठोरतम कार्रवाई करे और ऐसे मामलों को उदाहरण बनाकर प्रस्तुत करे।


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